जानें रसिक अनन्य जे अनुरागे रस प्रेम - ब्रज के दोहे

जानें रसिक अनन्य जे अनुरागे रस प्रेम - ब्रज के दोहे

जानें रसिक अनन्य जे, अनुरागे रस प्रेम ।
फिरत सदा उन्मत्त से, तजि निषेध विधि नेम॥

- ब्रज के दोहे

वास्तविक अनन्य रसिक वे हैं जिनका अनुराग नित्यप्रति प्रिया-प्रियतम को प्रेमपूर्वक लाड़ लड़ाने में लगा रहता है। वे विधि, निषेध और नियमों को त्यागकर, सदा प्रेम-रस में मग्न रहकर, उन्मत्त भाव से विचरण करते हैं।