(कवित्त)
कीर्तन के यूथ देख उठती उमंग एक,
गोबर्द्धन को देख गोवर्द्धन धरैया की । [1]
भूल जाता ज्ञान सभी देख ज्ञान गुदड़ी को,
चीरघाट देखकर चीर के चुरैया की ॥ [2]
सेवा कुंज देख सुध होती श्यामसुन्दर की,
वंशीवट देख देख वंशी के बजैया की । [3]
यमुना हिलोरें देख हिलता हृदय हाय,
कालीदह देख याद आती है कन्हैया की ॥ [4]
- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृन्दावन शतक (3)
श्री धाम वृन्दावन में कीर्तन-मंडलियों को देखकर हृदय में उमंग उठती है। गोवर्धन पर दृष्टि पड़ते ही गोवर्धन-धारण करने वाले कृष्ण की स्मृति हो जाती है। [1]
ज्ञान गुदड़ी देखते ही समस्त ज्ञान भूल जाता है। चीरघाट पर नज़र पड़ते ही वस्त्र-हरण-लीला के नायक श्री कृष्ण की याद आती है। [2]
सेवाकुंज के दर्शन से श्यामसुन्दर राधारानी के चरणों को दबाते हैं, ऐसी सुधि जाग उठती है। वंशीवट देखकर बार-बार वंशी-वादक (श्री कृष्ण) का ध्यान होता है । [3]
यमुना की लहरें देखकर हृदय प्रेम-रस में हिलोरें लेने लगता है । कालीदह देखते ही कन्हैया की याद उमड़ आती है। [4]
कीर्तन के यूथ देख उठती उमंग एक,
गोबर्द्धन को देख गोवर्द्धन धरैया की । [1]
भूल जाता ज्ञान सभी देख ज्ञान गुदड़ी को,
चीरघाट देखकर चीर के चुरैया की ॥ [2]
सेवा कुंज देख सुध होती श्यामसुन्दर की,
वंशीवट देख देख वंशी के बजैया की । [3]
यमुना हिलोरें देख हिलता हृदय हाय,
कालीदह देख याद आती है कन्हैया की ॥ [4]
- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृन्दावन शतक (3)
श्री धाम वृन्दावन में कीर्तन-मंडलियों को देखकर हृदय में उमंग उठती है। गोवर्धन पर दृष्टि पड़ते ही गोवर्धन-धारण करने वाले कृष्ण की स्मृति हो जाती है। [1]
ज्ञान गुदड़ी देखते ही समस्त ज्ञान भूल जाता है। चीरघाट पर नज़र पड़ते ही वस्त्र-हरण-लीला के नायक श्री कृष्ण की याद आती है। [2]
सेवाकुंज के दर्शन से श्यामसुन्दर राधारानी के चरणों को दबाते हैं, ऐसी सुधि जाग उठती है। वंशीवट देखकर बार-बार वंशी-वादक (श्री कृष्ण) का ध्यान होता है । [3]
यमुना की लहरें देखकर हृदय प्रेम-रस में हिलोरें लेने लगता है । कालीदह देखते ही कन्हैया की याद उमड़ आती है। [4]

