साँवर ससि सँग लसि प्रिया, भरी सरस रस छंद।
डोलत हैं श्रीराधिका, अति ही आजु आनंद॥
- श्रीभट्ट देवाचार्य, युगल शतक (67)
जिस प्रकार चंद्रमा के संग ज्योत्सना शोभायमान लगती है, उसी प्रकार श्यामसुन्दर के संग श्री राधिका रस में भरी परम शोभायमान हैं। आज वे अति ही आनंद में भरकर डोल रही हैं।
डोलत हैं श्रीराधिका, अति ही आजु आनंद॥
- श्रीभट्ट देवाचार्य, युगल शतक (67)
जिस प्रकार चंद्रमा के संग ज्योत्सना शोभायमान लगती है, उसी प्रकार श्यामसुन्दर के संग श्री राधिका रस में भरी परम शोभायमान हैं। आज वे अति ही आनंद में भरकर डोल रही हैं।

