सहजो भवसागर बहै तिमिर बरस घर घोर  - श्री सहजो बाई

सहजो भवसागर बहै तिमिर बरस घर घोर - श्री सहजो बाई

‘सहजो’ भवसागर बहै, तिमिर बरस घर घोर।
ता में नाम जहाज है, पार उतारैं तोर ॥

- श्री सहजो बाई

सहजोबाई कहती हैं कि यह संसार अगाध भवसागर के समान है, जिसमें अज्ञान का घना अँधकार बरस रहा है। ऐसे अंधकारमय सागर से केवल नाम-रूपी जहाज ही ऐसा साधन है, जो जीव को सुरक्षित रूप से पार उतार देता है।