आय कुँवर ठाड़े भये, नवल कुंवरि के संग ।
अहो प्रिये या पुलिन में, उपजत कोटि तरंग ॥
- श्री माधुरी दास, वंशीवट माधुरी (154)
कुँवर (श्यामसुन्दर) नवल कुँवरि (श्रीराधा) के संग यमुना-पुलिन में वंशीवट पर खड़े हैं जहाँ प्रेम-रस की अनंत तरंगें उमड़ रही हैं।
अहो प्रिये या पुलिन में, उपजत कोटि तरंग ॥
- श्री माधुरी दास, वंशीवट माधुरी (154)
कुँवर (श्यामसुन्दर) नवल कुँवरि (श्रीराधा) के संग यमुना-पुलिन में वंशीवट पर खड़े हैं जहाँ प्रेम-रस की अनंत तरंगें उमड़ रही हैं।

