पतितन में विख्यात हों - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (17)

पतितन में विख्यात हों - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (17)

पतितन में विख्यात हों, महापतित मम नाम ।
अब याचक होय जाच हो, शरणागति सब याम॥

- गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (17)

हे श्रीकृष्ण! मैं पतितों में सर्वाधिक प्रसिद्ध हूँ — ‘महापतित’ ही मेरा नाम है। अब मैं आपसे याचक बनकर यह प्रार्थना करता हूँ कि प्रत्येक क्षण मेरी शरणागति आपके श्रीचरणों में अटल बनी रहे।