मुक्ति भुक्ति सब खोखली भक्ति भरी रस रंग - ब्रज के दोहे

मुक्ति भुक्ति सब खोखली भक्ति भरी रस रंग - ब्रज के दोहे

मुक्ति भुक्ति सब खोखली, भक्ति भरी रस रंग।
मुक्ति अचल जस पोखरी, भक्ति बहै जस गंग ॥

- ब्रज के दोहे

मुक्ति (मोक्ष) और भुक्ति (भोग) भीतर से खोखले हैं, जबकि भक्ति रस और आनंद से परिपूर्ण है। मुक्ति स्थिर जल-भरी पोखरी के समान है, पर भक्ति बहती हुई स्वच्छ गंगा की तरह जीवंत और प्रवाहमान है।