तिष्ठेद्युगसहस्रं तु पादेनैकेन  वराहपुराण, मथुरा महात्म (165.60)

तिष्ठेद्युगसहस्रं तु पादेनैकेन वराहपुराण, मथुरा महात्म (165.60)

तिष्ठेद्युगसहस्रं तु पादेनैकेन यः पुमान् ।
तस्याधिकं भवेत्पुण्यं मथुरायां निवासिनः॥

- वराहपुराण, मथुरा महात्म (165.60)

जो मनुष्य एक हजार युगों तक एक पैर पर खड़ा रहता है (तपस्या करके), उससे कहीं अधिक फल मथुरा (ब्रज) निवासी प्राप्त करता है ।