राधा रास-सिरोमनी, राधा केलि-कुलीन।
राधा सकल कला-भरी, रसमूरति हितलीन॥
- श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रिया प्रसाद (81)
श्रीराधा रास की शिरोमणि और केलि-लीला की परम कुलीन स्वरूपा हैं। वे समस्त कलाओं से परिपूर्ण, स्वयं रसस्वरूपिणी तथा प्रेम में पूर्णतः लीन रहने वाली प्रेम की अधिष्ठात्री हैं।
राधा सकल कला-भरी, रसमूरति हितलीन॥
- श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रिया प्रसाद (81)
श्रीराधा रास की शिरोमणि और केलि-लीला की परम कुलीन स्वरूपा हैं। वे समस्त कलाओं से परिपूर्ण, स्वयं रसस्वरूपिणी तथा प्रेम में पूर्णतः लीन रहने वाली प्रेम की अधिष्ठात्री हैं।

