(राग शुद्ध कल्याण त्रिताल)
जयति जयति वृषभानु दुलारी ।
जय वृन्दावन परम मनोहर, लता फूल फुलवारी ॥ [1]
जय वंशीवट जय श्रीयमुना, सेवाकुञ्ज तिहारी ।
जयति जय मनमोहन प्यारी, जय जय रसिक हियारी ॥ [2]
जय हो श्रीवन व्रज मण्डल की, जय छवि रूप उजारी ।
श्रीगोपालहित हरि स्वामिनि, सब व्रज की रखवारी ॥ [3]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (06)
वृषभानु दुलारी, श्री राधा महारानी की बार-बार जय हो। उस परम मनोहर श्री धाम वृन्दावन की जय हो, जहाँ लताओं, कुंजों और पुष्पों की सुगन्धित फुलवारी सदा शोभायमान रहती है। [1]
श्री राधारानी के अति पावन लीला-स्थल वंशीवट, श्री यमुना और सेवाकुञ्ज की जय हो। मनमोहन श्यामसुन्दर की प्राणप्यारी, रसिकों के हृदय में नित्य वास करने वाली श्री राधा की जय हो। [2]
जिनके दिव्य रूप की उज्ज्वल छवि सम्पूर्ण व्रज-मण्डल और श्री धाम वृन्दावन को आलोकित करती है, उन श्री राधारानी की जय हो। श्री हित गोपाल दास कहते हैं, जो श्री हरि की स्वामिनी और समस्त ब्रज की रक्षिका हैं, उन श्री राधा महारानी की सदा जय हो । [3]
जयति जयति वृषभानु दुलारी ।
जय वृन्दावन परम मनोहर, लता फूल फुलवारी ॥ [1]
जय वंशीवट जय श्रीयमुना, सेवाकुञ्ज तिहारी ।
जयति जय मनमोहन प्यारी, जय जय रसिक हियारी ॥ [2]
जय हो श्रीवन व्रज मण्डल की, जय छवि रूप उजारी ।
श्रीगोपालहित हरि स्वामिनि, सब व्रज की रखवारी ॥ [3]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (06)
वृषभानु दुलारी, श्री राधा महारानी की बार-बार जय हो। उस परम मनोहर श्री धाम वृन्दावन की जय हो, जहाँ लताओं, कुंजों और पुष्पों की सुगन्धित फुलवारी सदा शोभायमान रहती है। [1]
श्री राधारानी के अति पावन लीला-स्थल वंशीवट, श्री यमुना और सेवाकुञ्ज की जय हो। मनमोहन श्यामसुन्दर की प्राणप्यारी, रसिकों के हृदय में नित्य वास करने वाली श्री राधा की जय हो। [2]
जिनके दिव्य रूप की उज्ज्वल छवि सम्पूर्ण व्रज-मण्डल और श्री धाम वृन्दावन को आलोकित करती है, उन श्री राधारानी की जय हो। श्री हित गोपाल दास कहते हैं, जो श्री हरि की स्वामिनी और समस्त ब्रज की रक्षिका हैं, उन श्री राधा महारानी की सदा जय हो । [3]

![जयति जयति वृषभानु दुलारी - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (06)](https://images.brajrasik.org/69515fffa957d30004ad9932-m.jpeg)