पराभक्ति रस वर्धिनी, श्यामा सब सुख दैन ।
रसिक मुकुट मनि राधिका, जय नव नीरज नैन॥
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सेवा सुख (51)
श्री श्यामा जू (श्री राधा) पराभक्ति दान करने वाली, रस को बढ़ाने वाली हैं तथा समस्त सुखों को प्रदान करने वाली हैं। रसिकों के लिए वे ही परम शिरोमणि हैं। ऐसी नव कमल-सदृश नेत्रों वाली, श्री राधिका महारानी की जय हो।
रसिक मुकुट मनि राधिका, जय नव नीरज नैन॥
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सेवा सुख (51)
श्री श्यामा जू (श्री राधा) पराभक्ति दान करने वाली, रस को बढ़ाने वाली हैं तथा समस्त सुखों को प्रदान करने वाली हैं। रसिकों के लिए वे ही परम शिरोमणि हैं। ऐसी नव कमल-सदृश नेत्रों वाली, श्री राधिका महारानी की जय हो।

