भृकुटि बँक गढ़ मध्य में, नयन कोठरी वन्द ।
राधा कृपा कटाक्ष बिन, मिले न गोकुलचन्द॥
- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, श्याम शतक (07)
टेढ़ी भृकुटि मानो एक दुर्ग (किला) के समान है और नेत्र उस दुर्ग की बंद कोठरी हैं। श्री राधा की कृपा-दृष्टि के बिना गोकुलचन्द (श्री कृष्ण) के दर्शन कदापि नहीं हो सकते।
राधा कृपा कटाक्ष बिन, मिले न गोकुलचन्द॥
- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, श्याम शतक (07)
टेढ़ी भृकुटि मानो एक दुर्ग (किला) के समान है और नेत्र उस दुर्ग की बंद कोठरी हैं। श्री राधा की कृपा-दृष्टि के बिना गोकुलचन्द (श्री कृष्ण) के दर्शन कदापि नहीं हो सकते।

