भजौ मन राधे महारानी -  श्री हित परमानंद दास जी की वाणी, पदावली (79)

भजौ मन राधे महारानी - श्री हित परमानंद दास जी की वाणी, पदावली (79)

(राग अड़ानो)
भजौ मन राधे महारानी।
जिनके रस-जस गावत प्रमुदित, मनमोहन सब सुखदानी॥ [1]
करत सिंगारनि धनि-धनि मानत, छबि निरखत आनँददानी।
राधाबल्लभ 'हित परमानंद', प्रीति परस्पर हम जानी॥ [2]

- श्री हित परमानंद दास जी, श्री हित परमानंद दास जी की वाणी, पदावली (79)

हे मन! श्री राधा महारानी जू का अनन्य भाव से भजन करो। जिनके रसपूर्ण यश को मनमोहन श्री कृष्ण भी उन्मत्त होकर गान करते हैं एवं जो सबको सुख प्रदान करने वाली हैं। [1]

उनका श्रृंगार करते हुआ श्री कृष्ण स्वयं को धन्यातिधन्य मानते हैं और उनकी छवि का दर्शन अपार आनंद देने वाला है। श्री हित परमानन्द दास जी कहते हैं कि श्री राधा महारानी की कृपा से ही उन्हें युगल-रस की अनुभूति प्राप्त हुई है। [2]