प्रेमामृत रसानन्द मकरन्दौघ वर्षिणीम् ।
कदा पादारविन्देहं विन्दे दास्यं तवेश्वरी ॥
- श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (29)
हे स्वामिनि! हे प्रेमामृत के आनंदरस का मधुर रस बरसाने वाली श्री राधे! आप कब मुझे अपने चरणकमलों का दास्य प्रदान करेंगी?
कदा पादारविन्देहं विन्दे दास्यं तवेश्वरी ॥
- श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (29)
हे स्वामिनि! हे प्रेमामृत के आनंदरस का मधुर रस बरसाने वाली श्री राधे! आप कब मुझे अपने चरणकमलों का दास्य प्रदान करेंगी?

