श्याम सदा वश प्रीतिके, तीन भुवन विख्यात ॥
विना प्रीति नहिं पाइये, नन्दमहर को तात ॥
- श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास
श्यामसुन्दर सदा केवल प्रेम के ही अधीन रहते हैं—यह सत्य तीनों लोकों में सुविख्यात है। सच्चे प्रेम के बिना नन्दमहाराज के पुत्र श्रीकृष्ण की प्राप्ति कदापि संभव नहीं है।
विना प्रीति नहिं पाइये, नन्दमहर को तात ॥
- श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास
श्यामसुन्दर सदा केवल प्रेम के ही अधीन रहते हैं—यह सत्य तीनों लोकों में सुविख्यात है। सच्चे प्रेम के बिना नन्दमहाराज के पुत्र श्रीकृष्ण की प्राप्ति कदापि संभव नहीं है।

