धन धन वृन्दाविपिन पपीहा प्यारे - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (69)

धन धन वृन्दाविपिन पपीहा प्यारे - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (69)

धन धन वृन्दाविपिन पपीहा प्यारे ।
और नीर कौं पीवत नाहीं, स्वाँति बून्द के पारे॥ [1]
बारहमास प्यास को पामें, जिनके हरि रखवारे ।
अभयराम ये हू बड़भागी, रज में रहें विचारे ॥ [2]

- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (69)

वृन्दावन में रहने वाले पपीहे धन्य हैं। वे अन्य जल नहीं पीते, केवल स्वाति नक्षत्र की बूंद की ही प्रतीक्षा करते हैं। [1]

जिनके रक्षक स्वयं श्रीहरि हैं, जिनकी बारह महीने की प्यास को स्वयं श्री हरि ही पूर्ण करते हैं। ‘अभयराम’ कहते हैं— यह पपीहा अत्यन्त भाग्यशाली हैं, जो वृन्दावन की रज में निवास करते हैं। [2]