ठकुराई प्यारी लई, सिवकाई पी वांट।
प्रीति रीति यक सार सखि, दई मनों यक सांट ॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, फुटकर पद (69)
वृन्दावन की अनुपम प्रेम-लीला में श्री राधा ने ठकुराई (स्वामित्व) ले ली और श्री कृष्ण ने सेवकाई स्वीकार कर ली। दोनों ने अपने मन को, अपना सर्वस्व, एक-दूसरे में समर्पित कर दिया, इस प्रकार से कि दोनों के मन एक हो गए। हे सखी! प्रेम की रीति का यही सच्चा सार है।
प्रीति रीति यक सार सखि, दई मनों यक सांट ॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, फुटकर पद (69)
वृन्दावन की अनुपम प्रेम-लीला में श्री राधा ने ठकुराई (स्वामित्व) ले ली और श्री कृष्ण ने सेवकाई स्वीकार कर ली। दोनों ने अपने मन को, अपना सर्वस्व, एक-दूसरे में समर्पित कर दिया, इस प्रकार से कि दोनों के मन एक हो गए। हे सखी! प्रेम की रीति का यही सच्चा सार है।

