श्रीवृन्दावन तेरी जय होवे।
हे करुणाधन रसिकन जीवन रसमय कानन जय होवे॥ [1]
हे अभयंकर परम शुभंकर युगल प्रियंकर जय होवे।
हृदय धरोहर परम मनोहर महामोदकर जय होवे॥ [2]
परम प्रभाकर प्रेम सुधाकर रस रत्नाकर जय होवे।
'राधाचरणदास' हृदयधन जय होवे तेरी जय होवे॥ [3]
- श्री राधाचरण दास, वृन्दावन विरुदावली (35)
हे श्रीवृन्दावन धाम! तुम्हारी बारम्बार जय हो।तुम करुणा के अगाध भंडार हो, रसिकों के प्राण-जीवन हो और रसमय लीलाओं से परिपूर्ण दिव्य वन हो—तुम्हारी जय हो। [1]
तुम अभय प्रदान करने वाले हो, परम मंगलकारी और श्री प्रिया-प्रियतम के अत्यंत प्रिय नित्य धाम हो। तुम भक्तों के हृदय की अमूल्य निधि हो, अति मनोहर हो और अनुपम आनंद प्रदान करने वाले हो। [2]
तुम सर्वोच्च प्रकाश स्वरूप, प्रेम-सुधा की निरंतर वर्षा करने वाले हो और रस रूपी रत्नों की अक्षय खान हो। श्री राधाचरणदास के हृदय का सर्वस्व धन हो—हे श्रीवृन्दावन! तुम्हारी ही सदा जय हो। [3]
हे करुणाधन रसिकन जीवन रसमय कानन जय होवे॥ [1]
हे अभयंकर परम शुभंकर युगल प्रियंकर जय होवे।
हृदय धरोहर परम मनोहर महामोदकर जय होवे॥ [2]
परम प्रभाकर प्रेम सुधाकर रस रत्नाकर जय होवे।
'राधाचरणदास' हृदयधन जय होवे तेरी जय होवे॥ [3]
- श्री राधाचरण दास, वृन्दावन विरुदावली (35)
हे श्रीवृन्दावन धाम! तुम्हारी बारम्बार जय हो।तुम करुणा के अगाध भंडार हो, रसिकों के प्राण-जीवन हो और रसमय लीलाओं से परिपूर्ण दिव्य वन हो—तुम्हारी जय हो। [1]
तुम अभय प्रदान करने वाले हो, परम मंगलकारी और श्री प्रिया-प्रियतम के अत्यंत प्रिय नित्य धाम हो। तुम भक्तों के हृदय की अमूल्य निधि हो, अति मनोहर हो और अनुपम आनंद प्रदान करने वाले हो। [2]
तुम सर्वोच्च प्रकाश स्वरूप, प्रेम-सुधा की निरंतर वर्षा करने वाले हो और रस रूपी रत्नों की अक्षय खान हो। श्री राधाचरणदास के हृदय का सर्वस्व धन हो—हे श्रीवृन्दावन! तुम्हारी ही सदा जय हो। [3]

