मा कुरुकर्म न योगं - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (7.09)

मा कुरुकर्म न योगं - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (7.09)

मा कुरुकर्म न योगं न विष्णुभजनं न वा श्रवणम्‌ ।
ध्रुवमवाप्स्यसि परपदं वृन्दारण्ये यथा तथा तिष्ठन्‌॥

- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (7.09)

मत करो कोई कर्म, मत करो योग, मत करो विष्णु का भजन, मत करो उनके गुणों का श्रवण। तुम्हें केवल इतना ही करना है कि जैसे बन पड़े, वैसे ही वृन्दावन में पड़े रहो। केवल वृन्दावन में पड़े रहने मात्र से ही तुम निश्चित रूप से परम पद को प्राप्त कर लोगे।