ललित फागु रचना रची, बिलसत सरस बसंत।
जै जै राधा माधवी, जै बनमाली कंत॥
- श्री घनानंद जी, घनानंद ग्रंथावली, सरस वसंत (66)
परम मनोहर फाग (होली-विलास) की रचना रची गई है, और मधुर बसंत ऋतु आनंदपूर्वक शोभित हो रही है। माधव की प्रियतमा श्री राधा जू की जय हो, वनमाली प्रियतम श्रीकृष्ण की जय हो।
जै जै राधा माधवी, जै बनमाली कंत॥
- श्री घनानंद जी, घनानंद ग्रंथावली, सरस वसंत (66)
परम मनोहर फाग (होली-विलास) की रचना रची गई है, और मधुर बसंत ऋतु आनंदपूर्वक शोभित हो रही है। माधव की प्रियतमा श्री राधा जू की जय हो, वनमाली प्रियतम श्रीकृष्ण की जय हो।

