रतन जतन अँसौ करो, सतन करों बनवास ।
लतन-लतन तरि नैन भरि, निरखों बिबिध बिलास॥
- श्री किशोरी अलि (रत्न अलि को पत्र-व्यवहार)
सांसारिक सुखों को त्यागकर ऐसा प्रयत्न करो कि रसिकों की राजधानी श्रीधाम वृंदावन में रसिकों के संग वास मिल जाए। फिर वहाँ की लताओं-पाताओं के मध्य विराजित श्री श्यामा-श्याम की लीलाओं का नेत्र भरकर अवलोकन करो।
लतन-लतन तरि नैन भरि, निरखों बिबिध बिलास॥
- श्री किशोरी अलि (रत्न अलि को पत्र-व्यवहार)
सांसारिक सुखों को त्यागकर ऐसा प्रयत्न करो कि रसिकों की राजधानी श्रीधाम वृंदावन में रसिकों के संग वास मिल जाए। फिर वहाँ की लताओं-पाताओं के मध्य विराजित श्री श्यामा-श्याम की लीलाओं का नेत्र भरकर अवलोकन करो।

