श्री वृंदावन के वृक्ष को मरम न जाने कोय - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (73)

श्री वृंदावन के वृक्ष को मरम न जाने कोय - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (73)

श्री वृंदावन के वृक्ष को, मरम न जाने कोय।
एक पात को सुमर के, आप चतुर्भुज होय॥

- गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (73)

श्री वृन्दावन के वृक्षों की ऐसी महिमा है जिसका मर्म कोई भी नहीं जानता। यहाँ के वृक्षों के केवल एक पत्ते का स्मरण कर लेने मात्र से ही जीव के भीतर दिव्य, चतुर्भुज समान सामर्थ्य प्रकट हो जाता है, क्योंकि यहाँ के प्रत्येक वृक्ष और पत्ते में साक्षात श्रीकृष्ण विराजमान हैं।