होरी आईरी रंग रंगीली छवीली मन भाई ।
नव पल्लव कूसमित वृन्दाबन मधुप गुंज सुखदाई ॥ [1]
वाजन लगे ढफ और मुरली वोलन कोकिल लगत सुहाई ।
श्री ब्रजचन्द्र किशोरी मन वांछित व्रज पर फाग घुमाई॥ [2]
- श्री किशोरीदास (गौड़ीय संत)
रंगों से भरी, छबीली और मन को प्रिय लगने वाली होली आ गई है। नव पल्लव और पुष्पों से खिले वृंदावन में भौंरों की गूँज अत्यंत सुखद लग रही है। [1]
ढफ और मुरली बजने लगे हैं, कोयल की वाणी बहुत सुहावनी लग रही है। श्री ब्रजचन्द्र (कृष्ण) और किशोरी (राधा) मनचाही फाग खेल रहे हैं एवं समस्त व्रज को उस रंग में डूबा रहे हैं । [2]
नव पल्लव कूसमित वृन्दाबन मधुप गुंज सुखदाई ॥ [1]
वाजन लगे ढफ और मुरली वोलन कोकिल लगत सुहाई ।
श्री ब्रजचन्द्र किशोरी मन वांछित व्रज पर फाग घुमाई॥ [2]
- श्री किशोरीदास (गौड़ीय संत)
रंगों से भरी, छबीली और मन को प्रिय लगने वाली होली आ गई है। नव पल्लव और पुष्पों से खिले वृंदावन में भौंरों की गूँज अत्यंत सुखद लग रही है। [1]
ढफ और मुरली बजने लगे हैं, कोयल की वाणी बहुत सुहावनी लग रही है। श्री ब्रजचन्द्र (कृष्ण) और किशोरी (राधा) मनचाही फाग खेल रहे हैं एवं समस्त व्रज को उस रंग में डूबा रहे हैं । [2]

