ब्रज-वृन्दावन अघट रस राधा कृष्ण सरूप - ब्रज के दोहे

ब्रज-वृन्दावन अघट रस राधा कृष्ण सरूप - ब्रज के दोहे

ब्रज-वृन्दावन अघट रस, राधा कृष्ण सरूप।
नाम लेत पातक कटै, ज्यों हरिनाम अनूप॥

- ब्रज के दोहे

ब्रज वृन्दावन अद्भुत और असीम रस से परिपूर्ण है, जो स्वयं श्री राधा-कृष्ण का स्वरूप है। यहाँ की लीलास्थलियों के नाम लेने से पाप नष्ट हो जाते हैं। इनकी महिमा भी श्री हरिनाम की महिमा के समान अनुपम है।