नेक आगे आ श्याम तोपे रंग डारौं ।
अबीर गुलाल मलो मुख तेरे, गालन पर गुलचा मारौं ॥ [1]
चोबा चन्दन और अरगजा, कनक कटोरन भरि ढारौं।
'चन्द्रसखी' भज बालकृष्ण छवि, तन मन धन तोपे वारौं ॥ [2]
- श्री चंद्र सखी जी
हे श्याम! थोड़ा पास आओ, मैं तुम पर रंग डालूँ। तुम्हारे मुख पर अबीर-गुलाल मलूँ और गालों पर प्रेम से गुलचा लगा दूँ। [1]
सुगंधित चंदन, सुरभित अबीर और अरगजा सोने के कटोरे भर-भरकर तुम पर उँडेल दूँ। श्री चन्द्रसखी कहती हैं कि अपने गुरुदेव श्री हित बालकृष्ण जी की कृपा से तन, मन और धन सब कुछ तुम पर अर्पित कर दूँ। [2]
अबीर गुलाल मलो मुख तेरे, गालन पर गुलचा मारौं ॥ [1]
चोबा चन्दन और अरगजा, कनक कटोरन भरि ढारौं।
'चन्द्रसखी' भज बालकृष्ण छवि, तन मन धन तोपे वारौं ॥ [2]
- श्री चंद्र सखी जी
हे श्याम! थोड़ा पास आओ, मैं तुम पर रंग डालूँ। तुम्हारे मुख पर अबीर-गुलाल मलूँ और गालों पर प्रेम से गुलचा लगा दूँ। [1]
सुगंधित चंदन, सुरभित अबीर और अरगजा सोने के कटोरे भर-भरकर तुम पर उँडेल दूँ। श्री चन्द्रसखी कहती हैं कि अपने गुरुदेव श्री हित बालकृष्ण जी की कृपा से तन, मन और धन सब कुछ तुम पर अर्पित कर दूँ। [2]

