(कवित्त)
ब्रह्मा इंद्र कहैं हम चाहैं नाहिं पदवी कौ,
ब्रज के न बृच्छ भए बैठे इहाँ हारिकै। [1]
बर्नत हैं गोपी हम हारी नाहि लाल संग,
मान हिय हारि रहे वारि मन मारिकै॥ [2]
कहत कुबेर होते ब्रज के बटेर तौ तो,
बेर-बेर ब्रजनिधि रहत निहारिकै। [3]
ब्रज-रज मैं लोटत गुपाल हैं करत ख्याल,
यहै देखि हाल डारौं तीर्थ सबै वारिकै॥ [4]
- श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रज श्रृंगार (7)
ब्रह्मा और इन्द्र कहते हैं—हमें ब्रह्मलोक अथवा स्वर्गलोक के सम्राट की पदवी नहीं चाहिए। यदि ब्रज में एक वृक्ष बनने का भी सौभाग्य मिल जाए, तो हम सदा वहीं बने रहना चाहेंगे। [1]
गोपियाँ कहती हैं—इस ब्रज धाम में रहते हुए हम हारी नहीं हैं क्योंकि हमने लाल (श्रीकृष्ण) को अपना सर्वस्व मानकर स्वयं को उन पर न्योछावर कर दिया, और इसी में हमारे प्रेम की सच्ची जीत है। [2]
कुबेर कहते हैं—यदि मैं ब्रज का केवल एक छोटा-सा पक्षी (बटेर) ही होता, तो बार-बार इस ब्रज निधि, श्री राधा कृष्ण, को निहारता रहता। [3]
ब्रज की रज में लोटते हुए भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर मैं विचार करता हूँ—ऐसी परम महिमा से युक्त इस ब्रजधाम पर तो समस्त तीर्थों को भी न्योछावर कर दूँ। [4]
ब्रह्मा इंद्र कहैं हम चाहैं नाहिं पदवी कौ,
ब्रज के न बृच्छ भए बैठे इहाँ हारिकै। [1]
बर्नत हैं गोपी हम हारी नाहि लाल संग,
मान हिय हारि रहे वारि मन मारिकै॥ [2]
कहत कुबेर होते ब्रज के बटेर तौ तो,
बेर-बेर ब्रजनिधि रहत निहारिकै। [3]
ब्रज-रज मैं लोटत गुपाल हैं करत ख्याल,
यहै देखि हाल डारौं तीर्थ सबै वारिकै॥ [4]
- श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रज श्रृंगार (7)
ब्रह्मा और इन्द्र कहते हैं—हमें ब्रह्मलोक अथवा स्वर्गलोक के सम्राट की पदवी नहीं चाहिए। यदि ब्रज में एक वृक्ष बनने का भी सौभाग्य मिल जाए, तो हम सदा वहीं बने रहना चाहेंगे। [1]
गोपियाँ कहती हैं—इस ब्रज धाम में रहते हुए हम हारी नहीं हैं क्योंकि हमने लाल (श्रीकृष्ण) को अपना सर्वस्व मानकर स्वयं को उन पर न्योछावर कर दिया, और इसी में हमारे प्रेम की सच्ची जीत है। [2]
कुबेर कहते हैं—यदि मैं ब्रज का केवल एक छोटा-सा पक्षी (बटेर) ही होता, तो बार-बार इस ब्रज निधि, श्री राधा कृष्ण, को निहारता रहता। [3]
ब्रज की रज में लोटते हुए भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर मैं विचार करता हूँ—ऐसी परम महिमा से युक्त इस ब्रजधाम पर तो समस्त तीर्थों को भी न्योछावर कर दूँ। [4]

