आठ पहर सुमिरन करै, बिसरै ना छिन एक।
अष्टादस और चार में, सहजो यही बिसेष ॥
- श्री सहजो बाई
भगवान का सुमिरन आठों पहर, अर्थात् प्रत्येक श्वास के साथ निरंतर करते रहना चाहिए, और एक क्षण के लिए भी उन्हें नहीं भूलना चाहिए। चारों वेद, अठारह पुराण तथा समस्त धर्मग्रंथों का यही सार है।
अष्टादस और चार में, सहजो यही बिसेष ॥
- श्री सहजो बाई
भगवान का सुमिरन आठों पहर, अर्थात् प्रत्येक श्वास के साथ निरंतर करते रहना चाहिए, और एक क्षण के लिए भी उन्हें नहीं भूलना चाहिए। चारों वेद, अठारह पुराण तथा समस्त धर्मग्रंथों का यही सार है।

