बिहारी लाल बाँकरे जू अनोखे ।
करत नये-नये ख्याल कौतुकी, भूलि रहे काऊ धोखे ? ॥ [1]
नाना रंग दरसाइ विपिन में, सब ही रस दै पोखे ।
अब क्यों जारति बिरह जरनि बलि, किशोरी, रूप रस तोखे॥ [2]
- श्री किशोरी अलि जी, विनय के पद (50)
श्री किशोरी अलि जी, श्री बिहारी जी से निवेदन करते हैं—
हे बिहारी जी! आप अनोखे बाँके हैं। विविध प्रकार के अनोखे ख्याल लीलाएँ करते-करते कहीं मुझे धोखे में भूल तो नहीं गए? [1]
आपने नाना प्रकार की प्रेम-लीलाएँ दर्शाकर, असीम आनन्द प्रदान करके, पहले मुझे वृन्दावन में अलौकिक रस से पोषित किया था— तो अब हे बिहारी जी! मुझे अपनी विरहाग्नि में क्यों जला रहे हो? [2]
करत नये-नये ख्याल कौतुकी, भूलि रहे काऊ धोखे ? ॥ [1]
नाना रंग दरसाइ विपिन में, सब ही रस दै पोखे ।
अब क्यों जारति बिरह जरनि बलि, किशोरी, रूप रस तोखे॥ [2]
- श्री किशोरी अलि जी, विनय के पद (50)
श्री किशोरी अलि जी, श्री बिहारी जी से निवेदन करते हैं—
हे बिहारी जी! आप अनोखे बाँके हैं। विविध प्रकार के अनोखे ख्याल लीलाएँ करते-करते कहीं मुझे धोखे में भूल तो नहीं गए? [1]
आपने नाना प्रकार की प्रेम-लीलाएँ दर्शाकर, असीम आनन्द प्रदान करके, पहले मुझे वृन्दावन में अलौकिक रस से पोषित किया था— तो अब हे बिहारी जी! मुझे अपनी विरहाग्नि में क्यों जला रहे हो? [2]

