ढिंग विलास-गढ़ दान-गढ़, और मान-गढ़ नाम ।
गौर घटा उनवति इहां, चात्रिक वह घनस्याम ॥
- श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (23)
बरसाना के विलासगढ़, दानगढ़ और मानगढ़ नामक दिव्य लीला-स्थलों में गौरवर्णी श्री राधा की प्रेम-घटा निरंतर उमड़ती रहती है, जहाँ श्री कृष्ण, चातक के समान, उस प्रेम-रस का निरंतर पान करते रहते हैं।
गौर घटा उनवति इहां, चात्रिक वह घनस्याम ॥
- श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (23)
बरसाना के विलासगढ़, दानगढ़ और मानगढ़ नामक दिव्य लीला-स्थलों में गौरवर्णी श्री राधा की प्रेम-घटा निरंतर उमड़ती रहती है, जहाँ श्री कृष्ण, चातक के समान, उस प्रेम-रस का निरंतर पान करते रहते हैं।

