राधा नाम सों चित रांच - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (202)

राधा नाम सों चित रांच - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (202)

(राग देस)
राधा नाम सों चित रांच।
राधा नाम रेख सुचि रुचिसों, अंतस कागद खांच। [1]
राधा नाम अंक आभूषन भूषित कर अँग नाच।
राधा नाम लिखी पाटुलिया ललित किशोरी वाँच ॥ [2]

- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (202)

अपने मन को श्री राधा-नाम में पूर्णतः रमा दो। अपने भीतर के कागज़ (अंतःकरण) पर निर्मल और प्रेमपूर्ण रुचि के साथ राधा-नाम की रेखाएँ अंकित कर दो। [1]

अंग-अंग पर राधा-नाम के अंक (चिह्न) को ही आभूषण बनाकर धारण करो और उसी आनंद में नृत्य करने लगो। श्री ललित किशोरी कहते हैं कि ऐसे अंतःकरण पर राधा-नाम से लिखी हुई “पाटुलिया” (पुस्तिका/पत्र) को श्यामा-श्याम बड़े चाव से पढ़ते हैं। [2]