कुंजमहल में आज रंग होरी - श्री बनी ठनी जी

कुंजमहल में आज रंग होरी - श्री बनी ठनी जी

(राग-खम्मायची)
कुंजमहल में आज रंग होरी ।
फाग खेल में बनावनीकी, ह्वै रही पट गठजोरी ॥ [1]
मुदित ह्वै नारि गुलाल उड़ावें, गावैं गारि दुहुँ ओरी।
दूलह 'रसिकविहारी' सुन्दर, दुलहनि नवलकिशोरी॥ [2]

- श्री बनी ठनी जी

आज कुंज-महल में रंगीली होली मची है। फाग खेलते-खेलते एक सुंदर संयोग बना है — राधा और कृष्ण के वस्त्रों की 'गठजोरी' (गाँठ जोड़ना) हो रही है। [1]

सखियाँ (गोपियाँ) अत्यंत प्रसन्न होकर गुलाल उड़ा रही हैं और दोनों ओर से प्रेमभरी 'गालियाँ' (होली के मधुर गीत) गा रही हैं। इस दिव्य उत्सव में सुंदर श्रीकृष्ण दूल्हा बने हैं और श्रीराधा दुल्हन बनी हैं। [2]