राधा नाम जपौ दिन रैना - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (72)

राधा नाम जपौ दिन रैना - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (72)

(राग मालकोश, त्रिताल)
राधा नाम जपौ दिन रैना ।
जो कोई राधा नाम सुनावे, तबहि परै हिय चैना॥ [1]
श्रीराधा गाऊँ राधा लड़ाऊँ, राधा सुने ये बैना ।
राधा नाम रसीलो रटिहों, छवि आवे हिय नैना ॥ [2]
रवि तनया प्यारी जब देखूँ , बोलूँ कर-कर सैना।
हितगोपाल श्रीनाम की महिमा, कैसे कहत बनैना॥ [3]

- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (72)

निशदिन राधा‑नाम का ही भजन करना चाहिए। जब कोई मुझे यह नाम सुनाता है, तभी मेरे हृदय को वास्तविक शांति (चैन) मिलती है। [1]

मैं प्रत्येक क्षण श्रीराधा का ही गुणगान करूँ, उन्हीं से लाड़ करूँ और अपनी समस्त विनतियाँ भी उन्हीं के चरणों में निवेदित करूँ। राधा-नाम अनंत रस से परिपूर्ण है, इसलिए इस राधा नाम का सुमिरन करने से श्री राधा की मनोहर स्वरूप की छवि मेरे हृदय और नेत्रों में सजीव होकर प्रकट हो जाती है। [2]

जब भी मैं रवि-तनया श्री यमुना-जी की सुकोमल धारा का दर्शन करता हूँ, तो ऐसा अनुभव होता है मानो वे भी संकेतों में राधा-नाम का ही मधुर गान कर रही हों। मैं उन्हें बारंबार प्रणाम करता हूँ। श्री हितगोपाल दास कहते हैं कि इस पावन राधा-नाम की महिमा शब्दों में बखान नहीं की जा सकती। [3]