नाम लियैं पातिक कटैं, पहुँचै हरि के देस।
'छौना' के गीरही जपौ, कै अतीत के भेस॥
- श्री गुरु छौनाजी महाराज
भगवान का नाम लेने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और जीव अंततः हरि के धाम को प्राप्त करता है। श्री छौना जी महाराज कहते हैं कि यह नाम चाहे गृहस्थ (गीरही) जपे या विरक्त संन्यासी (अतीत), दोनों को ही समान फल मिलता है। बाहरी भेष का इसमें कोई महत्व नहीं है, क्योंकि सार बात केवल ‘नाम-स्मरण’ है, न कि बाह्य रूप या वेशभूषा।
'छौना' के गीरही जपौ, कै अतीत के भेस॥
- श्री गुरु छौनाजी महाराज
भगवान का नाम लेने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और जीव अंततः हरि के धाम को प्राप्त करता है। श्री छौना जी महाराज कहते हैं कि यह नाम चाहे गृहस्थ (गीरही) जपे या विरक्त संन्यासी (अतीत), दोनों को ही समान फल मिलता है। बाहरी भेष का इसमें कोई महत्व नहीं है, क्योंकि सार बात केवल ‘नाम-स्मरण’ है, न कि बाह्य रूप या वेशभूषा।

