नमो नमो जु भक्ति रिझवार - श्री वृंदावन दास जी

नमो नमो जु भक्ति रिझवार - श्री वृंदावन दास जी

नमो नमो जु भक्ति रिझवार ।
नाम विदित गोपेश्वर जिनकौ,
ते वृन्दा कानन कुतुवार॥ [1]
यात्रा सुफल होत बस जबहीं,
जो रज वन्दै इन दरवार।
‘वृन्दावन हित’ रूप सखी वपु,
सेवत दम्पति नित्य विहार॥ [2]

- श्री हित वृंदावन दास

मैं उन भगवान शिव को बार-बार नमस्कार करता हूँ जो केवल भक्ति से प्रसन्न हो जाते हैं। जिनका नाम जगत में 'गोपेश्वर' (गोपियों के ईश्वर) के रूप में प्रसिद्ध है, वे ही इस वृंदावन के रक्षक (कोतवाल) हैं। [1]

ब्रज की यात्रा तभी सफल मानी जाती है जब कोई गोपेश्वर महादेव के दर्शन करता है तथा यहाँ की रज को मस्तक पर लगाता है। श्री हित वृन्दावन दास कहते हैं कि गोपेश्वर महादेव सखी का रूप धारण करके कुंजों में दिव्य दंपति प्रिया-प्रियतम (राधा-कृष्ण) की सेवा करते हैं तथा नित्य विहार रस का पान करते हैं। [2]