वेद भेद पायो नहीं - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (8)

वेद भेद पायो नहीं - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (8)

वेद भेद पायो नहीं, भए पुरान पुरान ।
स्मृतिहू की सब स्मृति गई, पै न मिले भगवान॥

- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (8)

वेदों को भी भगवान का रहस्य नहीं मिल पाया और पुराण उन्हें खोजते-खोजते स्वयं पुराने (जीर्ण-शीर्ण) हो गए, फिर भी वे ईश्वर की थाह न पा सके। स्मृतियों ने भी उन्हें समझने के प्रयास में अपनी सुध-बुध खो दी, पर इन ग्रंथों मात्र से प्रभु की प्राप्ति न हुई। सार यह है कि ईश्वर की प्राप्ति केवल निष्काम प्रेम और शरणागति से ही संभव है।