व्यास न व्यापक देखिये निर्गुण परै न जानि - श्री हरिराम व्यास,  व्यास वाणी, साखी (87)

व्यास न व्यापक देखिये निर्गुण परै न जानि - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (87)

व्यास न व्यापक देखिये, निर्गुण परै न जानि।
तब भक्तनि हित औतरे, (श्री) राधावल्लभ आनि॥

- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (07)

श्री हरिराम व्यासजी कहते हैं कि वह परब्रह्म सर्वव्यापक होने के कारण इन चर्म चक्षुओं से दिखाई नहीं देता और निर्गुण होने के कारण बुद्धि की पहुँच से परे है। तब अपने भक्तों के कल्याण और उन्हें रसास्वादन कराने के लिए, वही परम तत्व श्री राधावल्लभ के रूप में साक्षात् प्रकट होकर अवतरित हुआ है।