जाकों कहिये मूढ जग, दुख दौं लागी हेर।
जमुना वृन्दाविपिन तजि, धावत बीकानेर॥
- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह)
जो जीव श्री यमुना जी के पावन तट और दिव्य श्री वृन्दावन धाम की अलौकिक रस-संपदा को त्यागकर, सांसारिक सुख-सुविधाओं की खोज में बीकानेर या अन्य स्थलों की ओर भागते हैं, वे ही वास्तविक मूर्ख हैं, मानो अनंत सुख का त्याग कर वे दुखों के दावानल के लिए भटक रहे हों।
जमुना वृन्दाविपिन तजि, धावत बीकानेर॥
- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह)
जो जीव श्री यमुना जी के पावन तट और दिव्य श्री वृन्दावन धाम की अलौकिक रस-संपदा को त्यागकर, सांसारिक सुख-सुविधाओं की खोज में बीकानेर या अन्य स्थलों की ओर भागते हैं, वे ही वास्तविक मूर्ख हैं, मानो अनंत सुख का त्याग कर वे दुखों के दावानल के लिए भटक रहे हों।

