याही रस-मय नाम सौं राखत प्रेम अपार - श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (94.2)

याही रस-मय नाम सौं राखत प्रेम अपार - श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (94.2)

याही रस-मय नाम सौं, राखत प्रेम अपार ।
लगत तुच्छ पुरुषार्थ सब, यह आगैं सुकुमार॥

- श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (94.2)

जिसके प्रभाव के सामने धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे चारों पुरुषार्थ भी तुच्छ प्रतीत होते हैं, उस परम रसमय “राधा” नाम से श्रीकृष्ण अपार प्रेम रखते हैं।