प्राणनाथ या जगत में, सो अभागिनी नार।
तुम्हें त्यागि पुनि चहै जो, सुख कुटुम्ब परिवार ॥
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, रास पंचाध्यायी लीला (11)
एक गोपी कहती है—हे प्राणनाथ (श्री कृष्ण)! इस संसार में वह स्त्री (अथवा जीव-रूपी नारी) अत्यंत अभागिनी है, जो आपको त्यागकर पुनः सांसारिक कुटुंब और परिवार के सुखों की चाहना करती है।
तुम्हें त्यागि पुनि चहै जो, सुख कुटुम्ब परिवार ॥
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, रास पंचाध्यायी लीला (11)
एक गोपी कहती है—हे प्राणनाथ (श्री कृष्ण)! इस संसार में वह स्त्री (अथवा जीव-रूपी नारी) अत्यंत अभागिनी है, जो आपको त्यागकर पुनः सांसारिक कुटुंब और परिवार के सुखों की चाहना करती है।

