रसिवो बसिवो वृन्दावन को - ब्रज के सवैया

रसिवो बसिवो वृन्दावन को - ब्रज के सवैया

(सवैया)
रसिवो बसिवो वृन्दावन को, हसिवो मिलि सन्तन में रहिए । [1]
पढ़िवो गुनिवो नित रास सदा, सुख सौं लहि जो जितनौ चहिए ॥ [2]
जहि जोगी जती हिय ध्यान करें, जग जीवनि भाग बड़ौ लहिए । [3]
भ्रमना मिटि जाय सबै जिय की, जमुना जमुना जमुना कहिए ॥ [4]

- ब्रज के सवैया

श्री वृन्दावन धाम में वास करना, उसी रस में डूबना और संतों के संग में आनंदपूर्वक रहना ही परम सौभाग्य है। [1]

नित्य 'रास-लीला' के विषय में पढ़ना एवं मनन करना चाहिए, जिससे हृदय को असीमित सुख प्राप्त होता है। [2]

जिस दिव्य तत्व को योगी और यति अपने हृदय में ध्यान करते हैं, उसे प्राप्त करना ही इस जगत में जीवन का सबसे बड़ा भाग्य है। [3]

यदि मन के समस्त भ्रम और संशयों को मिटाना चाहते हो, तो निरंतर 'जमुना, जमुना, जमुना' का नाम जपते रहिए। [4]