बहुतक पीर कहावते बहुत करत हैं भेस - श्री मलूक दास

बहुतक पीर कहावते बहुत करत हैं भेस - श्री मलूक दास

बहुतक पीर कहावते, बहुत करत हैं भेस।
यह मन कहर खोदाय का, मारे सो दुरबेस ॥

- श्री मलूक दास

इस संसार में अनेक ऐसे झूठे पीर और गुरु हैं जो भेष धारण कर लोगों को अपने जाल में फँसाते हैं। परंतु यह बात भली-भाँति समझ लेनी चाहिए कि केवल भेष से कोई साधु या पीर नहीं होता; जब तक वह भीतर बैठे अपने मन को न जीत ले, तब तक वह सच्चा संत नहीं हो सकता।