धन धन वृन्दावन जमुना जल पानी - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (02)

धन धन वृन्दावन जमुना जल पानी - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (02)

धन धन वृन्दावन जमुना जल पानी ।
उठे तरंग अंग सों लागे, कटै पाप ज्यों घानी ॥ [1]
साधु संत अस्नान करत हैं, भजन करत हैं ज्ञानी ।
अभयराम रज वनकी महिमा, आप करी पटरानी ॥ [2]

- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (02)

श्री वृन्दावन में प्रवाहित होती श्री यमुना जी का जल परम धन्य है। जब यमुना जी की लहरें उठकर शरीर का स्पर्श करती हैं, तो वे संचित पापों के घने समूह (परतों) को सहजता से काट देती है। [1]

यहाँ साधु-संत स्नान करते हैं और ज्ञानीजन प्रभु का भजन करते हैं। श्री अभयराम जी कहते हैं कि हे यमुने! वृन्दावन की रज की महिमा आपसे ही है, और उसी रज की महिमा में आपका पटरानी-रूप भी प्रतिष्ठित है। [2]