मोसों हँसि हो लाडिली, हौं हँसिंहों तेहि सँग ॥
मेरे करिहै गुदगुदी, हौं करिहौं तेहि अँग ॥
- श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (40)
मेरे साथ श्रीलाड़िलीजी (राधा) हँसती-खेलती हैं और मैं भी उनके साथ हँसती हूँ। जब वे प्रेम में भरकर मुझे गुदगुदी करके हँसाती हैं, तब मैं भी उनके अंगों को गुदगुदी कर देती हूँ।
मेरे करिहै गुदगुदी, हौं करिहौं तेहि अँग ॥
- श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (40)
मेरे साथ श्रीलाड़िलीजी (राधा) हँसती-खेलती हैं और मैं भी उनके साथ हँसती हूँ। जब वे प्रेम में भरकर मुझे गुदगुदी करके हँसाती हैं, तब मैं भी उनके अंगों को गुदगुदी कर देती हूँ।

