भानु कुंवरि पद कमल की, भक्ति कली गुलाब ।
पीरी माँटी की डरी, मुक्ति न जापै आब ॥
- ब्रज के दोहे
वृषभानु-नन्दिनी श्री राधा के चरण-कमलों के प्रति जो अनन्य भक्ति है, वह तो खिले हुए गुलाब की कली के समान सुकोमल और सुगंधित है। इसके विपरीत, मोक्ष (मुक्ति) तो केवल पीली मिट्टी के एक सूखे ढेले के समान है, जिसमें न तो कोई चमक (आब) है और न ही कोई रस।
पीरी माँटी की डरी, मुक्ति न जापै आब ॥
- ब्रज के दोहे
वृषभानु-नन्दिनी श्री राधा के चरण-कमलों के प्रति जो अनन्य भक्ति है, वह तो खिले हुए गुलाब की कली के समान सुकोमल और सुगंधित है। इसके विपरीत, मोक्ष (मुक्ति) तो केवल पीली मिट्टी के एक सूखे ढेले के समान है, जिसमें न तो कोई चमक (आब) है और न ही कोई रस।

