कब मेरे मनमहँ बसै, वृन्दावन वर धाम ।
कब रसना निशि दिन रटै, सुख तैं श्यामा श्याम॥
- श्रीप्रभुदत्तजी ब्रह्मचारी, श्रीवृन्दावन माहात्म्य (1)
वह शुभ दिन कब आएगा, जब वनराज श्रीधाम वृंदावन मेरे हृदय में ही बस जाएगा? कब मेरी जिह्वा रात-दिन श्रीश्यामा-श्याम के मधुर नामों को प्रेमपूर्वक रटेगी?
कब रसना निशि दिन रटै, सुख तैं श्यामा श्याम॥
- श्रीप्रभुदत्तजी ब्रह्मचारी, श्रीवृन्दावन माहात्म्य (1)
वह शुभ दिन कब आएगा, जब वनराज श्रीधाम वृंदावन मेरे हृदय में ही बस जाएगा? कब मेरी जिह्वा रात-दिन श्रीश्यामा-श्याम के मधुर नामों को प्रेमपूर्वक रटेगी?

