लोक लाज कुल कान की - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (77)

लोक लाज कुल कान की - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (77)

लोक लाज कुल कान की, लगी हिये में आग।
ललित लड़ैती युगल सों, कब होवै अनुराग॥

- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (77)

जब तक हृदय में लोक-प्रतिष्ठा और कुल की मर्यादा की ज्वाला दहकती रहती है, तब तक श्री राधा-कृष्ण के प्रति शुद्ध प्रेम का प्राकट्य नहीं हो सकता।