अब तौ प्रभु तारै बनै, नातर होत कुतार।
तुमहीं तारन-तरन हौ, सो मोरै आधार॥
- श्री रसनिधि
हे प्रभु (श्री राधा-कृष्ण)! अब तो आपको मेरा उद्धार करना ही होगा, अन्यथा मेरी बड़ी दुर्गति होगी। आप पतित-पावन हैं और आपने ही अनेक अधमों का उद्धार किया है। अब मेरी एकमात्र आशा आपकी अहैतुकी कृपा ही है। वही मेरा आधार है, अन्यथा अपने साधन से कोई आपको कैसे प्राप्त कर सकता है?
तुमहीं तारन-तरन हौ, सो मोरै आधार॥
- श्री रसनिधि
हे प्रभु (श्री राधा-कृष्ण)! अब तो आपको मेरा उद्धार करना ही होगा, अन्यथा मेरी बड़ी दुर्गति होगी। आप पतित-पावन हैं और आपने ही अनेक अधमों का उद्धार किया है। अब मेरी एकमात्र आशा आपकी अहैतुकी कृपा ही है। वही मेरा आधार है, अन्यथा अपने साधन से कोई आपको कैसे प्राप्त कर सकता है?

