मथ्यते तु जगत्सर्व ब्रह्मज्ञानेन येन वा।
मत्सारभूतं यद्यत्स्यान्मथुरा सा निगद्यते॥
- गोपाल तापिनी उपनिषद्, अर्थववेद
जिस ब्रह्मज्ञान एव भक्तियोग से सारा जगत् मथा जाता है, तथा ज्ञानी और भक्तों का सांसारिक बंधन विलीन हो जाता है, और जहाँ सदा सारभूत ज्ञान तथा भक्ति का नित्य निवास रहता है, वही पावन धाम ‘मथुरा’ कहलाता है।
मत्सारभूतं यद्यत्स्यान्मथुरा सा निगद्यते॥
- गोपाल तापिनी उपनिषद्, अर्थववेद
जिस ब्रह्मज्ञान एव भक्तियोग से सारा जगत् मथा जाता है, तथा ज्ञानी और भक्तों का सांसारिक बंधन विलीन हो जाता है, और जहाँ सदा सारभूत ज्ञान तथा भक्ति का नित्य निवास रहता है, वही पावन धाम ‘मथुरा’ कहलाता है।

