(राग खम्माज त्रिताल)
श्यामा चरण कमल की आस॥
श्रीवृन्दावन रानी राधे, रखिये अपने पास।
यमुना पुलिन प्यारो सोहे, सेवाकुञ्ज निज खास॥ [1]
युगल माधुरी नैनन देखूँ, वनूँ तिहारी दास।
श्रीगोपाल हित हरि स्वामिनि, हिये रचावो रास॥ [2]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (32)
हे श्यामा जू! मुझे केवल आपके चरण-कमलों से ही आशा है। हे श्री वृन्दावन की स्वामिनी श्री राधे! कृपा करके मुझे अपने समीप ही स्थान दीजिए। जहाँ यमुना जी का प्यारा तट सुशोभित है और आपका अपना निज-खास स्थली श्री सेवाकुञ्ज है, वहीं मुझे वास प्रदान कीजिए। [1]
मैं अपने नेत्रों से युगल सरकार की उस दिव्य माधुरी का दर्शन करती रहूँ और सदा आपकी दासी बनी रहूँ। श्री हित गोपाल दास कहते हैं कि हे हरि की स्वामिनी! आप मेरे हृदय में अपनी दिव्य रास-लीला को प्रकट कीजिए। [2]
श्यामा चरण कमल की आस॥
श्रीवृन्दावन रानी राधे, रखिये अपने पास।
यमुना पुलिन प्यारो सोहे, सेवाकुञ्ज निज खास॥ [1]
युगल माधुरी नैनन देखूँ, वनूँ तिहारी दास।
श्रीगोपाल हित हरि स्वामिनि, हिये रचावो रास॥ [2]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (32)
हे श्यामा जू! मुझे केवल आपके चरण-कमलों से ही आशा है। हे श्री वृन्दावन की स्वामिनी श्री राधे! कृपा करके मुझे अपने समीप ही स्थान दीजिए। जहाँ यमुना जी का प्यारा तट सुशोभित है और आपका अपना निज-खास स्थली श्री सेवाकुञ्ज है, वहीं मुझे वास प्रदान कीजिए। [1]
मैं अपने नेत्रों से युगल सरकार की उस दिव्य माधुरी का दर्शन करती रहूँ और सदा आपकी दासी बनी रहूँ। श्री हित गोपाल दास कहते हैं कि हे हरि की स्वामिनी! आप मेरे हृदय में अपनी दिव्य रास-लीला को प्रकट कीजिए। [2]

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