सहचरि देखत दुहुन को - श्री पीतांबर देव जी की बानी (59)

सहचरि देखत दुहुन को - श्री पीतांबर देव जी की बानी (59)

सहचरि देखत दुहुन को, पिंजरा पंछी तोल।
भूख प्यास पोषत भले, रटत प्रिया मृदुवोल॥

- श्री पीतांबर देव जी, श्री पीतांबर देव जी की बानी (59)

सहचरी  युगल सरकार (श्री राधा-कृष्ण) को अपलक निहारती रहती है, मानो वह पिंजरे में बंद किसी पक्षी के समान हो गई हो। जिस प्रकार पिंजरे का पक्षी अपने स्वामी द्वारा दिए गए दाने-पानी पर ही जीवित रहता है, वैसे ही सखी अपनी भूख-प्यास की निवृत्ति केवल उनके दर्शनों से करती है और निरंतर श्री प्रिया जी के नामों को ही रटती रहती है।